शक्ति राय

नरेन्द्रपुर में गढ़ का निर्माण शक्ति राय ने किया था। उन्होंने नरौनी समुदाय का विस्तार किया और गाँव की नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

सीताराम सिंह

परिवार, आज नरेन्द्रपुर गाँव के जिस घर में निवास करता है उसकी नींव सीताराम सिंह ने रखी थी। इन्होंने परिवार के अनेक घरों का निर्माण करवाया।

शिव कुमार सिंह

ये संगीत के बड़े जानकार और उपासक थे। नरेन्द्रपुर के अपने घर पर संगीत की महफिलें आयोजित करते थे।

कृष्ण कुमार सिंह

ये नरेंद्रपुर के अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्ति थे एवं आयुर्वेद के ज्ञाता थे और गाँव में सभी की सहायता किया करते थे। इन्हें भ्रमण और तीर्थयात्रा का विशेष शौक था।

सूबा सिंह

ये नरेन्द्रपुर गाँव के उन व्यक्तियों में से थे जिन्हें गाँव की प्रत्येक जमीन का संपूर्ण ज्ञान था। अमीन के कार्य में इनकी दक्षता ने गाँव प्रशासन और भूमि व्यवस्था को सुदृढ़ किया।

राजनन्दन सिंह (बबुआ काका)

गाँव में ‘बबुआ काका’ के नाम से प्रसिद्ध ये नरौनी परिवार के अत्यंत लोकप्रिय सदस्य थे। कृषि कार्यों के प्रति गहरी रुचि रखते थे। इनका आकर्षक व्यक्तित्व और सहयोगी स्वभाव गाँव

पारसनाथ सिंह

ये क्षेत्रीय स्तर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई थी। जब शहीद उमाकांत सिंह को ब्रिटिश सरकार द्वारा बलिदान देना पड़ा,

राजनारायण सिंह

नरेन्द्रपुर गाँव के प्रथम पोस्टमास्टर रहे। डाक व्यवस्था के माध्यम से गाँव को बाहरी दुनिया से जोड़ने में इनका योगदान महत्वपूर्ण था।

बच्चू सिंह

ये अपने तेज स्वभाव और गहरी राजनीतिक समझ के लिए जाने जाते थे। ग्रामीण राजनीति में इनकी पकड़ और निर्णय क्षमता ने गाँव के सामूहिक जीवन को प्रभावित किया।

शंभू प्रसाद सिंह

3 जनवरी 1917 में नरेन्द्रपुर, सिवान में जन्मे शंभू प्रसाद सिंह, कृष्ण कुमार सिंह के एकलौते पुत्र थे। इन्होंने पटना एवं छपरा में शिक्षा प्राप्त की और 1941 पटना लॉ कॉलेज से डिग्री प्राप्त की।

दशरथ सिंह

स्वभाव से गंभीर, किंतु आंतरिक राजनीति और दांव-पेंच के कुशल खिलाड़ी थे। गाँव की रणनीतिक गतिविधियों में इनकी विशेष भूमिका रही।

विश्वनाथ सिंह

सरल और सहज स्वभाव के व्यक्ति थे। इनके व्यक्तित्व में अपनापन और मिलनसारिता स्पष्ट झलकती थी।

रुद्र प्रताप सिंह

ये नरेंदरपुर पंचायत के निर्विरोध निर्वाचित मुखिया रहे, जिन्होंने 25 वर्षों से अधिक समय तक यह जिम्मेदारी निभाई। अत्यंत सौम्य, सहिष्णु और शांतिप्रिय व्यक्ति थे।

उमाकांत प्रसाद सिंह

11 अगस्त 1942 के दिन पटना सेक्रेटेरियट पर भारत का झण्डा फहराकर आंदोलन करने वाले छात्रों में नरेन्द्रपुर के उमाकांत सिंह भी थे। बचपन से देश प्रेम का जज्बा उनमें कूट कूट कर भरा था।

सूर्य सिंह

हंसमुख और मजाकिया स्वभाव के साथ-साथ गुस्सैल प्रकृति के भी थे। गाँव के सामाजिक जीवन में इनकी उपस्थिति हमेशा प्रभावी रही।

समुंदर सिंह

ये गांधीवादी विचारधारा के अनुयायी और अत्यंत विनम्र, शांत व सौम्य प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। इन्होंने गाँव में सभी त्योहारों को पूरे उत्साह और सामूहिकता के साथ मनाने की परंपरा को आगे बढ़ाया।

मुन्नी सिंह

पटना उच्च न्यायालय में कार्यरत रहे और सीधे-साधे सरल स्वभाव के कारण सम्मानित एवं विश्वसनीय व्यक्ति के रूप में विख्यात रहे।

रामाधार सिंह

हालाँकि ये औपचारिक रूप से मैट्रिक परीक्षा पास नहीं कर सके, लेकिन अंग्रेजी भाषा पर इनकी पकड़ गाँव में प्रशंसनीय थी। इन्होंने रघुनाथपुर प्रखंड में कार्य किया था,

डॉ फणीश सिंह

डॉ फणीश सिंह अपने गाँव नरेन्द्रपुर के विशिष्ट व्यक्ति थे। उनका जन्म 3 दिसम्बर 1940 में गाँव नरेन्द्रपुर में हुआ।

श्यामधाता सिंह

ठेकेदारी के पेशे से जुड़े होने के बावजूद सांस्कृतिक गतिविधियों में गहरी रुचि रखते थे। विशेषकर नाटक और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी की वजह से इनकी लोकप्रिय पहचान बनी।

ध्रुप सिंह

ये नरौनी परिवार के ऊर्जावान और प्रेरणादायी सदस्य थे। फुटबॉल के प्रति विशेष रुचि रखते थे और प्रायः गाँव के बाहर भी गोलकीपर की भूमिका में खेलते थे।

चंद्रशेखर सिंह

ग्रामीण डॉक्टर के रूप में इन्होंने गाँव के स्वास्थ्य जीवन को समर्पित सेवा दी। इनके सहज और मिलनसार स्वभाव ने इन्हें सभी का प्रिय बना दिया।

सूर्यशेखर सिंह

ये सरल एवं सहज स्वभाव वाले व्यक्ति थे और गाँव में अपने विनोदी और मिलनसार व्यक्तित्व के कारण लोकप्रिय रहे।

राघवेन्द्र सिंह

ये यात्रा प्रेमी, जनसंपर्क में कुशल और सेवा भाव से ओत-प्रोत व्यक्तित्व हैं। गाँव में इन्हें ‘पारस बाबू के चेले’ के रूप में जाना जाता है, जैसा कि लोग कहते हैं—

कमलेन्द्र कुमार सिंह

ये महेन्द्र हाई स्कूल, जीरादेई से सेवानिवृत्त उच्च विद्यालय के शिक्षक हैं। अत्यंत ज्ञानी, सामाजिक और गाँव के ऐतिहासिक संदर्भों को याद रखने वाले व्यक्ति हैं।

माधवेन्द्र कुमार सिंह

ये नरौनी परिवार के सौम्य, मिलनसार और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रेमी सदस्य रहे हैं। इन्हें नाट्य मंचन का विशेष शौक था और समय-समय पर गाँव में आयोजित नाटकों

चंद्रकीर्ति सिंह

ये नरौनी परिवार के सक्रिय, मिलनसार और सहृदय सदस्य थे। शहीद उमाकांत सिंह के पुत्र थे। इन्होंने सेंट ज़ेवियर्स स्कूल, पटना में शिक्षा प्राप्त की थी।

मनीष प्रसाद सिंह

ये नरौनी परिवार के सम्मानीय सदस्य हैं। ये वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और संघमित्रा पब्लिक स्कूल सिवान के अध्यक्ष हैं। ये शिक्षा, तथा साहित्य संस्कृति को लेकर अत्यंत सजग रहते हैं,

हरीकीर्ति सिंह

कैप्टन हरिकीर्ति सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सम्मानित अधिकारी थे। सेवानिवृत्ति के पश्चात भी वे अपने गाँव से गहरे जुड़े रहे और सामुदायिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

शिवकीर्ति सिंह

13 नवंबर 1951 नरेन्द्रपुर सिवान में इनका जन्म हुआ। इनके पिता जस्टिस शंभू प्रसाद सिंह थे। इन्होंने सैनिक स्कूल तिलैया, पटना कॉलेज, एवं पटना लॉ कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की।