नरेन्द्रपुर ग्राम की लोकस्मृति में बघाउत बाबा हैं।  जिन्हें ग्रामींनों  ने  स्नेहपूर्वक “बघाउत बाबा” नाम दिया। वे  एक वीर, साहसी और अतिप्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनके जीवन से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, बघाउत बाबा कुएलाचक नामक स्थान से आ रहे थे और मैरवा के समीप उनकी बाघ से मुलाकात हो गईं (जो नरेन्द्रपुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है)।

ग्राम परंपरा बताती है कि यह कोई साधारण संघर्ष नहीं था; बघाउत बाबा ने बाघ से युद्ध करते हुए लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय की और अंततः नरेन्द्रपुर पहुँचकर उसे एक वृक्ष से बाँधकर पराजित किया। यह अद्भुत पराक्रम गाँव की लोककथाओं में आज भी जीवंत है, और इसी साहसिक कार्य के कारण वे एक अद्वितीय शक्ति के प्रतीक बन गए।

हालाँकि वर्तमान में उनके स्मरण हेतु कोई भौतिक संरचना उपलब्ध नहीं है, फिर भी ग्रामीण जन उन्हें अत्यंत सम्मान से याद करते हैं। जिस स्थल पर यह संघर्ष हुआ, वहाँ  आज घर का निर्माण हो गया हैं, परंतु गाँव की सामूहिक स्मृति में वह भूमि साहस, शक्ति और विजय का प्रतीक मानी जाती है। बघाउत बाबा का नाम आज भी गाँव में बहादुरी और लोकवीरता के पर्याय के रूप में लिया जाता है।