1942, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अनेक छात्रों ने पटना सेक्रेटेरियट में आंदोलन किया और भारत का झण्डा फहराने की कोशिश की। उन्ही में थे उमाकांत सिंह नरेन्द्रपुर गाँव के अत्यंत विनीत छात्र। अँग्रेज़ों ने उनपर गोली दाग दी, जिसकी वजह से उन्होंने अपनी ज़िंदगी का बलिदान दिया। बिहार सरकार ने उन शहीद छात्रों की स्मृति का सम्मान करते हुए एक स्मारक का निर्माण किया है।

नरेन्द्रपुर में जस्टिस शंभू प्रसाद सिंह ने अपने शहीद चचेरे भई एवं मित्रवर उमाकांत सिंह की स्मृति में एक प्रतिमा की स्थापना का प्रयास किया। दुर्भाग्य से उनके दिवंगत होने की वजह से इस प्रतिमा की स्थापना बाद में सितंबर 28, 1997 को नरेन्द्रपुर गाँव में हुई।