यह बाज़ार पहले खुले में लगता था और स्थानीय लोगों में इसका विशिष्ट सांस्कृतिक महत्व था। समय के साथ, उपेक्षा और अव्यवस्थित उपयोग के कारण यह स्थल अपनी मूल गरिमा खोता गया और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते इसका स्वरूप धीरे-धीरे बिगड़ने लगा। वर्ष 2019 में नरेन्द्रपुर के नरौनी परिवार के शिवकुमार सिंह के वंशजों ने इसके पुनर्निर्माण की पहल की तथा स्टूडियो मैटर डिजाइन संस्था के सहयोग से चबूतरों का निर्माण, छाया की व्यवस्था और प्राकृतिक वायु प्रवाह हेतु अनुकूल ढांचा विकसित किया गया। वर्तमान में यह हाट सप्ताह में दो बार, एतवार और बुधवार को आयोजित होता है। अनाज, मसाले, मछली, मांस, कपड़े तथा अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएँ यहाँ उपलब्ध होती हैं, और लेन-देन की सुविधा के लिए डिजिटल माध्यम जैसे यूपीआई भी सुलभ हैं। इस हाट का संचालन और रखरखाव स्कूल विकास ट्रस्ट, नरेन्द्रपुर द्वारा किया जाता है। यह हाट आसपास के क्षेत्र के लिए आर्थिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है और अपने आधुनिक स्वरूप में स्थानीयता तथा ऐतिहासिकता पर आधारित एक अनुकरणीय व टिकाऊ मॉडल के रूप में स्थापित हो रहा है।



