सहबुढ़न साई

सहबुढ़न साई, जिन्हें गाँव के लोग “सापुरन बाबा” कहकर पुकारते हैं, नारेंदरपुर ग्राम की सामुदायिक स्मृति में एक सिद्ध फकीर के रूप में स्थापित हैं। कहा जाता है

शिव मंदिर एवं पोखर

इस शिव मंदिर को सीताराम सिंह ने 1880 में बनवाया था। उन्होंने यह मंदिर अपने पुत्र शिव कुमार सिंह के जन्म के अवसर पर बनवाया। इस मंदिर में शिवलिंग के

बघाउत बाबा

नरेंदरपुर ग्राम की लोकस्मृति में बघाउत बाबा हैं। जिन्हें ग्रामींनों ने स्नेहपूर्वक “बघाउत बाबा” नाम दिया। वे एक वीर, साहसी और अतिप्रभावशाली व्यक्तित्व के

नरेन्द्रपुर बाजार

यह बाज़ार पहले खुले में लगता था। इसका सांस्कृतिक महत्व था लेकिन धीरे धीरे यह स्थल बिना सुविधा के गंदगी एवं कुकृत्यों का अड्डा बन गया।

उच्च माध्यमिक विद्यालय

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जाने वाला सरकारी उच्च विद्यालय नरेंद्रपुर , गांधी स्मृति के निकट स्थित है। यह संस्थान आसपास के किशोरों के सशक्तिकरण की

शहीद उमाकांत उच्च विद्यालय

इस विद्यालय के क्षेत्र में खुलने से पहले क्षेत्र के छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए दूर दूर तक जाना आदत था। जीरादेई सबसे नजदीक क्षेत्र था जहाँ छात्र जाते थे।

रामकिशोरी देवी मेमोरियल अस्पताल

1991 में क्षेत्र में अस्पतालों की कमी को महसूस करते हुए, फणीश सिंह ने परिवार को प्रेरित किया कि सब मिलजुलकर गाँव के शिव मंदिर के समीप एक अस्पताल की स्थापना करें।

उप – डाकघर

उप – डाकघर की अच्छी सुविधा है। यहाँ पैसे जमा करने तथा निकालने की भी सुविधा है। पत्र स्पीड पोस्ट से भी भेजे जा सकते है।

ग्रामीण बैंक

इस बैंक से रुपयों की जमा-निकासी भली भांति होती है। के सी सी की भी किसानों को सुविधा प्राप्त है लेकिन किसान लोग बैंक की के सी सी कार्य प्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं।

शाहिद उमाकांत सिंह स्मारक

1942, भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अनेक छात्रों ने पटना सेक्रेटेरियट में आंदोलन किया और भारत का झण्डा फहराने की कोशिश की। उन्ही में थे

शिवकुमार सिंह संगीत महाविद्यालय

शिव कुमार सिंह जिनके नाम पर यह विद्यालय है, एक ख्यात संगीतज्ञ थे। वे पखावज बजाते थे। उन्हे रागी, बागी एवं जोगी कहा जाता था। रागी -वे ध्रुपद भी गाते

गांधी स्मृति

भारत को अंग्रेज़ी साम्राज्यवादी ताकतों से आज़ादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले महात्मा गांधी की छवि आज भी सभी के दिल में श्रद्धा और प्यार से जीवित है।

कविता स्मृति अगस्त क्रांति पुस्तकालय

यह पुस्तकालय फणीश सिंह द्वारा 2017-18 में बनवाया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में पढ़ने लिखने की ललक पैदा करना और लोगों में पाठ्यक्रम से अलग ज्ञान

शंभू प्रसाद सिंह सामुदायिक भवन

इसका निर्माण नरौनी परिवार के सदस्य हरीकीर्ति सिंह के प्रयास से हुआ। इसका शिलान्यास 5 नवंबर 2016 में हुआ था। नरेन्द्रपुर गाँव के लोगों के लिए यह सुविधाजनक

परिवर्तन

इस संस्था का शिलान्यास 29 नवंबर 2009 में हुआ। पूरी क्षमता से इसने 2011 में काम करना शुरू किया। यह तक्षशिला एजुकेशनल सोसाइटी के अंतर्गत कार्य

रंगकरघा

नरेंद्रपुर के ऐतिहासिक शिव मंदिर के निकट, पारंपरिक कलाकारी से सुसज्जित कपड़ा बनाने की इकाई का नाम रंगकरघा है। यह इकाई महिलाओं को आजीविका के